दोहराता हूँ राणा के भाला की लिखी कहानी |
इस भारत की रक्षा खातिर फिर से चढी जवानी ||
राजधर्म तो अपने में था खुद की लाज बचाना |
उस पर मुग़लकाल को फन पर चढ़कर जाना ||
सुने युद्ध की बातें सिंहासन डोल गया होगा |
राणा के अन्दर का हलहल करता खून खौल गया होगा ||
रण के अन्तस से उर में भवानी जाग गई होगी |
राणा के हर सैनिक में सेनानी जाग गई होगी ||
हर हर महादेव का नारा देना है कुर्बानी |
दोहराता हूँ राणा के भाला की लिखी कहानी ||(१)
एक हाथ से धड़ को काटे एक हाथ से शीश |
मानों माता माँग रही हो मेवाड़ी आशीष ||
सब हकल -बिकल है उधर पडे देखो तो हाहाकार उठा |
वीर सपूतों की धरती में एकसाथ हुंकार उठा ||
जयजय उद्घोष हुई धरती भगवा का झंडा फहर गया |
रामराज्य की विजय हुई रावण खुद से फिर हहर गया ||
सौ बार नमन है तुमको तो राणा की सफल जवानी |
दोहराता हूँ राणा के भाला की लिखी कहानी || (२)
डड्गडंग सी करती धरती भूचाल यहाँ पर आया था |
एक वीर ऐसा भी था जो सम्मान बचाने आया था ||
बडे गर्व की बातें हैं स्वाभिमान से जीना है |
घासों की रोटी अच्छी है गंगा का पानी पीना है ||
हे! मुग़लकाल के वंशज सुन तेरे भी दुर्दिन आयेंगे |
तेरे अपने खुद शौक तेरे धरती से तुझे मिटायेंगे ||
तेरे अन्तकाल में तो हर तरफ रहे वीरानी |
दोहराता हूँ राणा के भारत की लिखी कहानी ||(३)
-Vikas Vishwa