Vikas Vishwa
Tuesday, 21 June 2022
Tuesday, 1 June 2021
बेरोज़गारी
"ज़रा मजबूरियां बहुत बेजार बैठे हैं
सितम है वक्त का बेरोजगार बैठे हैं
रहम करना ज़रा हम पर सियासत के मेरे लोगों
ये डिग्रियां ये नेमतें इनके हम कर्जदार बैठे हैं।(१)
अवसाद का शिकार अब होने लगी हैं डिग्रियां
पढ़ लिख के गैर रोजगार रोने लगी हैं डिग्रियां
फ़िर होगी नई चर्चा फिर होंगे अब चुनाव
फ़िर से बढ़ाए जायेंगे विधायकों के भाव(२)
—Vikas Vishwa
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किसी तलस्मी चराग़ की रगड़ का बेइंतहां इंतजार हूं
हंसो मेरे दोस्त कि मैं बेगार हूं।
सुबह शाम और रात की तंज की तफ़्तीश की भरमार हूं
हंसो मेरे दोस्त कि मैं बेगार हूं ।।
ये सत्तासीन खुद के तर्जुमें में बांध मुझको क्यूंकि तेरी रैलियों में २०० की दिहाड़ी की दरकार हूं ।
हंसो ज़रा ज़ोर से मेरे दोस्त कि मैं बेगार हूं ।।
कि हर एक रात अधऊंघे सपनों के उन्वान पर बेचैनियों का बाजार हूं ,
हंसो मेरे दोस्त कि मैं बेगार हूं ।
आवाज़ की सनद क्या दिल्ली क्या लखनऊ सब बहरे हैं , चीखता युवा हूं बेबस हूं लाचार हूं ।
जरा जोर से हंसो मेरे दोस्त कि मैं बेगार हूं ।।
मुठ्ठी भींचने कि भी सख़्त मनाही है मांगना मत हक,
वरना पीठ पर पड़े सफेद डंडों की बौछार हूं ।
रोना नहीं हंसो जरा जोर से मैं बेगार हूं ।।
—©® Vikas Vishwa
Sunday, 23 July 2017
आज़ाद
आज़ाद यहाँ मै आया हूँ आज़ाद यहाँ से जाऊँगा ||(१)
आज़ाद यहाँ मै आया हूँ आज़ाद यहाँ से जाऊँगा ||(२)
आज़ाद यहाँ मै आया हूँ आज़ाद यहाँ से जाऊँगा ||(३)
Wednesday, 14 June 2017
मुक्तक
अजब दस्तूर है मौला जो माँगू मिल नही पाता |
कोई एक दर्द मिटता है तो दूजा मिल ही जाता है||
खुशी की चाह मत करना ये मेरे इस जहां वालों
जो जितना सुख को पाता है वो उतना टूट जाता है || (१)
हर पल टूट जाता हूँ मैं हर पल मुस्कुराता हूँ |
तुमसे रूठ जाने की सजा मै खूब पाता हूँ ||
कि तुम कहती थी सारे तोड़ देंगे रश्म औ बन्धन
कहो कुछ भी मगर तुमको निभाना कुछ नहीं आता ||
-Vikas Vishwa
Sunday, 28 May 2017
जय हो
जय हो भारत माता ,तेरा ही अर्चन हो |
ये धरा महक जाये ,मेरा देश सुगन्धा हो ||
मेरे मन लहरों की ,बस एक तमन्ना है
जब मौत मेरी आये, मेरा ध्वजा तिरंगा हो |
जय हो भारत माता ,तेरा ही अर्चन हो ||(१)
गीता के वचन गूँजे ,श्रीराम का वन्दन हो |
वाहे गुरु की कृपा ,गौतम का दर्शन हो ||
चहुँ ओर धरा गूँजे ,जय विजय महारथ की
और धरा पे फिर, मेरी पावन गंगा हो |
जय हो भारत माता ,तेरा ही अर्चन हो ||(२)
-Vikas Vishwa