Tuesday, 1 June 2021

बेरोज़गारी

 "ज़रा मजबूरियां बहुत बेजार बैठे हैं 

सितम है वक्त का बेरोजगार बैठे हैं

रहम करना ज़रा हम पर सियासत के मेरे लोगों

ये डिग्रियां ये नेमतें इनके हम कर्जदार बैठे हैं।(१)


‌अवसाद का शिकार अब होने लगी हैं डिग्रियां


 पढ़ लिख के गैर रोजगार रोने लगी हैं डिग्रियां


फ़िर होगी नई चर्चा फिर होंगे अब चुनाव


फ़िर से बढ़ाए जायेंगे विधायकों के भाव(२)

—Vikas Vishwa


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किसी तलस्मी चराग़ की रगड़ का बेइंतहां इंतजार हूं 

हंसो मेरे दोस्त कि मैं बेगार हूं।


 सुबह शाम और रात की तंज की तफ़्तीश की भरमार हूं

 हंसो मेरे दोस्त कि मैं बेगार हूं ।।


 ये सत्तासीन खुद के तर्जुमें में बांध मुझको क्यूंकि तेरी रैलियों में २०० की दिहाड़ी की दरकार हूं ।

 हंसो ज़रा ज़ोर से मेरे दोस्त कि मैं बेगार हूं ।।


   कि हर एक रात अधऊंघे सपनों के उन्वान पर बेचैनियों का बाजार हूं ,

हंसो मेरे दोस्त कि मैं बेगार हूं ।


आवाज़ की सनद क्या दिल्ली क्या लखनऊ सब बहरे हैं , चीखता युवा हूं बेबस हूं लाचार हूं ।

 जरा जोर से हंसो मेरे दोस्त कि मैं बेगार हूं ।।


 मुठ्ठी भींचने कि भी सख़्त मनाही है मांगना मत हक, 

 वरना पीठ पर पड़े सफेद डंडों की बौछार हूं ।

 रोना नहीं हंसो जरा जोर से मैं बेगार हूं ।।

‌—©® Vikas Vishwa




Sunday, 23 July 2017

आज़ाद

अंग्रेज मुझे क्या मारोगे ,खुद की गोली मर जाऊँगा |
आज़ाद यहाँ मै आया हूँ ,आज़ाद यहाँ से जाऊँगा ||
मुझ जैसे हैं कई दिवाने इस भारत की माटी के|
लहू गर्म हैं धधक रहे हैं इस धरती परिपाटी के||
बीड़ा एक उठाया है भारत स्वतन्त्र हो जायेगा|
वन्दे मातरम् गाओ सब ये अमर मन्त्र हो जायेगा||
पिता ने मुझको शस्त्र दिये माता का वचन निभाऊँगा |
आज़ाद यहाँ मै आया हूँ आज़ाद यहाँ से जाऊँगा ||(१)
होली की रंगत चढ़ी यहाँ ,रंग फेको खूब गुलालों को|
अगर जरूरत पड़ती है माता भेजेगी लालों को||
रंग देंगे लाल लाल रंग ये धरा हरी हो जायेगी|
कई वर्ष के बाद यहाँ उन्मुक्त हवा लहरायेगी||
और शान्ति की इस धरती पर तीन रंग लहराऊँगा| 
आज़ाद यहाँ मै आया हूँ आज़ाद यहाँ से जाऊँगा ||(२)
बहना तेरी राखी को बेमोल दिये अब जाता हूँ|
माता को कहना आऊँगा चरणों में शीश नवाता हूँ||
गोली अन्तिम बन्दूक यही नहीं व्यर्थ चिन्ता करनी |
जो मृत्यु अटल है सदा सफल है मुलाकात उससे करनी||
आज़ाद जिया आज़ाद मरा आज़ाद यहीं रह जाऊँगा |
आज़ाद यहाँ मै आया हूँ आज़ाद यहाँ से जाऊँगा ||(३)
-Vikas Vishwa

Wednesday, 14 June 2017

मुक्तक

अजब दस्तूर है मौला जो माँगू मिल नही पाता |

कोई एक दर्द मिटता है तो दूजा मिल ही जाता है||

खुशी की चाह मत करना ये मेरे इस जहां वालों

जो जितना सुख को पाता है वो उतना टूट जाता है || (१)

हर पल टूट जाता हूँ मैं हर पल मुस्कुराता हूँ |

तुमसे रूठ जाने की सजा मै खूब पाता हूँ ||

कि तुम कहती थी सारे तोड़ देंगे रश्म औ बन्धन

कहो कुछ भी मगर तुमको निभाना कुछ नहीं आता ||

       -Vikas Vishwa

Sunday, 28 May 2017

जय हो

जय हो भारत माता ,तेरा ही अर्चन हो |

ये धरा महक जाये ,मेरा देश सुगन्धा हो ||

मेरे मन लहरों की ,बस एक तमन्ना है

जब मौत मेरी आये, मेरा ध्वजा तिरंगा हो |

जय हो भारत माता ,तेरा ही अर्चन हो ||(१)

गीता के वचन गूँजे ,श्रीराम का वन्दन हो |

वाहे गुरु की कृपा ,गौतम का दर्शन हो ||

चहुँ ओर धरा गूँजे ,जय विजय महारथ की

और धरा पे फिर, मेरी पावन गंगा हो |

जय हो भारत माता ,तेरा ही अर्चन हो ||(२)

       -Vikas Vishwa

Monday, 22 May 2017

ग्रामीण आँधी -पानी दृश्य

आलू भौंकी मां धरी रही बनवै के बरे रसोइयां मां |
आँधी कै साहस काव कही सब छीट दिहिस अँगनैया मां ||
पाँड़े कै पंडिया खुली रही मिली नहीं खुब भटकी ही |
एक धोती उडी रंगिलिया कै तव जाय पेड. मां लटकी ही ||
साया न मिला सुशीला कै छान्हिन्ह पर से यस लोप भवा |
कुछ रुपिया उड़ि गै सुद्धू कै यस गजब दयू कै कोप भवा ||
जैसे आँधी कुछ कमजोरान पानी कै लहरा आइ गवा |
कुछ फूहर गरियावै लागीं दैवा एकदम बौराय गवा ||

     — साभार असविंद दुबे जी (सबरस कवि)
न जाने काव करैंया बा चैते से अबकी मरत अहै |
तिसरे चौथे आँधी आवै कुसुमै माँ पानी भरत अहै ||
फिर कुलिन वरौनी चुवै लाग सब भीजि गवा भूँसा सारा |
सब हारि गयें सब ऊबि गयें सब का बजि गें पौने बारा ||
भल भागि रहीं बड़का भौजी भौंका भर आम लेहे घर का |
गट्टवा हंसी सै बड़े जोर जब गिरीं गडापै गोड. सरका ||
प्रधान कै रुकी बरात रहै जव पानी बरसा दुपहरिया मां |
छिछवा लेदर मचिगा सब जाय लुकानें सरिया मां ||
शुकुल बेचारे काव करैं उनकै मन एतना खीझि गवा |
गुस्सा मां वै कुछू न टारें बिस्तरौ तलक सब भीजि गवा ||
    

Sunday, 21 May 2017

मेरा -परिचय

नाम- विकास विश्व

पिता का नाम-श्री दूधनाथ मिश्रा
माता का नाम- श्रीमती शुभ लक्ष्मी मिश्रा
ग्राम-पितम्बरपुर
पोस्ट-शाहगढ़
पिन नं-227411
तहसील- गौरीगंज
थाना -मुन्शीगंज
जनपद-अमेठी
प्रदेश -उत्तर प्रदेश
   भारत
मो० नं०- 8795458078