मुर्गा बोले महतो उठि गें साथेन जागें कोलई
गाँव भरे के लरिके जुटि के पहिले फूँके होलई
फिर गायेन दू चार ठू फूहर पातर फगुआ
दउआ तव हुडदंग मचावै सव कै बनि के अगुआ
देखत देखत गाँव भरे माँ रब्दा होई गा चालू
सब मेहररुअये जुटी घरे कै आजी चुरवै आलू
पंचम कै छोटकई पतोहिया कहै सखी सहेली
दऊ दिहिस न देवर हमका केहसे खेली होली
आजी बोली एहमा कौनो हरज नाहीना
एहमा बाबा देवर लागैं फागुन मस्त महीना
बडे मजे मा जात रहेन्हे भेडी मोछा ऐंठे
खूब बनाइस हाथी यस टीकिस उनका बैठे बैठे
साड़ी तव सतरंगी होइ गै और बिलाउज आधा
ऐसन मजा कबो न पायीं सोलह बरस माँ राधा
चढ़े अमेठी मां गाड़ी पय रहें झिगूरी झांकत
कौनो मारिस आँख फूटि गय अन्तू डाकत डाकत
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