कभी मेंहदी महावर है कभी अंगार है कविता
कभी माँ प्रेम की गंगा की अनगढ धार है कविता
कभी जो स्वाभिमानी देश का अभिमान गाती है
महाराणा के भाला की प्रयोजित भाल है कविता |
Vikas Vishwa
कभी माँ प्रेम की गंगा की अनगढ धार है कविता
कभी जो स्वाभिमानी देश का अभिमान गाती है
महाराणा के भाला की प्रयोजित भाल है कविता |
Vikas Vishwa
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