अंग्रेज मुझे क्या मारोगे ,खुद की गोली मर जाऊँगा |
आज़ाद यहाँ मै आया हूँ ,आज़ाद यहाँ से जाऊँगा ||
मुझ जैसे हैं कई दिवाने इस भारत की माटी के|
लहू गर्म हैं धधक रहे हैं इस धरती परिपाटी के||
बीड़ा एक उठाया है भारत स्वतन्त्र हो जायेगा|
वन्दे मातरम् गाओ सब ये अमर मन्त्र हो जायेगा||
पिता ने मुझको शस्त्र दिये माता का वचन निभाऊँगा |
आज़ाद यहाँ मै आया हूँ आज़ाद यहाँ से जाऊँगा ||(१)
आज़ाद यहाँ मै आया हूँ आज़ाद यहाँ से जाऊँगा ||(१)
होली की रंगत चढ़ी यहाँ ,रंग फेको खूब गुलालों को|
अगर जरूरत पड़ती है माता भेजेगी लालों को||
रंग देंगे लाल लाल रंग ये धरा हरी हो जायेगी|
कई वर्ष के बाद यहाँ उन्मुक्त हवा लहरायेगी||
और शान्ति की इस धरती पर तीन रंग लहराऊँगा|
आज़ाद यहाँ मै आया हूँ आज़ाद यहाँ से जाऊँगा ||(२)
आज़ाद यहाँ मै आया हूँ आज़ाद यहाँ से जाऊँगा ||(२)
बहना तेरी राखी को बेमोल दिये अब जाता हूँ|
माता को कहना आऊँगा चरणों में शीश नवाता हूँ||
गोली अन्तिम बन्दूक यही नहीं व्यर्थ चिन्ता करनी |
जो मृत्यु अटल है सदा सफल है मुलाकात उससे करनी||
आज़ाद जिया आज़ाद मरा आज़ाद यहीं रह जाऊँगा |
आज़ाद यहाँ मै आया हूँ आज़ाद यहाँ से जाऊँगा ||(३)
आज़ाद यहाँ मै आया हूँ आज़ाद यहाँ से जाऊँगा ||(३)
-Vikas Vishwa
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