अजब दस्तूर है मौला जो माँगू मिल नही पाता |
कोई एक दर्द मिटता है तो दूजा मिल ही जाता है||
खुशी की चाह मत करना ये मेरे इस जहां वालों
जो जितना सुख को पाता है वो उतना टूट जाता है || (१)
हर पल टूट जाता हूँ मैं हर पल मुस्कुराता हूँ |
तुमसे रूठ जाने की सजा मै खूब पाता हूँ ||
कि तुम कहती थी सारे तोड़ देंगे रश्म औ बन्धन
कहो कुछ भी मगर तुमको निभाना कुछ नहीं आता ||
-Vikas Vishwa
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