Vikas Vishwa

Sunday, 21 May 2017

महाराणा प्रताप गाथा

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दोहराता हूँ राणा के भाला की लिखी कहानी | इस भारत की रक्षा खातिर फिर से चढी जवानी || राजधर्म तो अपने में था खुद की लाज बचाना | उस पर मुग़ल...

ग्रामीण -होली परिदृश्य

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मुर्गा बोले महतो उठि गें साथेन जागें कोलई गाँव भरे के लरिके जुटि के पहिले फूँके होलई फिर गायेन दू चार ठू फूहर पातर फगुआ दउआ तव हुडदं...

हास- परिहास

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हँसिया लै चमकावत बाटीं अँचरा लाल देखावत बाटीं राजनीति कै झोंटा खोले खबर-खबर खजुआवत बाटीं |      विकास विश्व
Saturday, 20 May 2017

कविता परिभाषा

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कभी मेंहदी महावर है कभी अंगार है कविता कभी माँ प्रेम की गंगा की अनगढ धार है कविता कभी जो स्वाभिमानी देश का अभिमान गाती है महाराणा के ...
Saturday, 13 May 2017

माँ

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माँ तेरी ममताओं का विधि -विधान सदी जीवित है वो गुदरी लगुरी का परिधान सदा जीवित है || कितनी ऊंची मंजिल कितने बडे उपक्रम हों माँ सब तो ...
Thursday, 11 May 2017

सलाम सेना

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हमारा हर एक सैनिक सवा लाख है पूरे भारत की वो जो सधी आंख है करते हरदम सदा दुश्मनों पर फतह हममें वो भी हुनर हममें वो धाक है          युवा...
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About Me

Vikas Vishwa
गढ़ते जा रहे जो नित नए आयाम लिखता हूं भारत के सुपुत्रों को सदा प्रणाम लिखता हूं ऊंचा ही रहे अपना तिरंगा "विश्व" में जमकर सुनहरी लेखनी बनकर मैं हिन्दुस्तान लिखता हूं । — Vikas Vishwa������
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